इस्लाम का प्रचार

इस्लाम का प्रचार

Blockquote-open.gif यह पुण्य नहीं कि तुम अपने मुँह को पूर्व या पश्चिम की ओर कर लो। पुण्य तो यह है - परमेश्वर, अन्तिम दिन, देवदूतों, पुस्तक और ऋषियों पर श्रृद्धा रखना, धन को प्रेमियों, सम्बन्धियों, अनाथों, दरिद्रों, पथिकों, याचिकों और गर्दन बचाने वालों के लिए देना, उपवास (रोज़ा) रखना, दान देना, जब प्रतिज्ञा कर चुके तो अपनी प्रतिज्ञा को पूर्ण करना, विपत्तियों, हानियों और युद्धों में सहिष्णु (होना), (जो ऐसा करते हैं) वही लोग सच्चे और संयमी हैं। Blockquote-close.gif



मेला के खास दिनों में (इमाहम के खास दिनों में)  दूर से आए तीर्थ यात्रियों के समूह को 
महात्मा पैगम्बर मोहम्मद ने 

छल पाखंड युक्त लोकाचार  और देवताओं की उपासना का खण्डन करके वह एक ईश्वर की उपासना,शुद्ध तथा सरल धर्म का अनुसरण करते थे।

मोहमद पैगम्बर ने अपने अनुयायिओं को (अफ्रीका खंड ) के ' हब्स' नामक राज्य में ( जहां का राजा बहुत न्याय पूर्ण माना  जाता था) चले जाने की अनुमति दी ।
कुरैशी नामक व्यक्तियो ने महात्मा पैगम्बर का खुले तौर पर विरोध किया था 

मदीना प्रवास नगर 

कुरेशियो के हमला करने पर माथमता पैगम्बर पर  
मदीना प्रवास अपनाना पड़ा
जबसे उनका निवास 'yastrit' में हुआ था 
मदीना नबी नगर प्रख्यात रखा गया था ।
कुरान में 23 खंड और 114 अध्ययनों में विभक्त की गई हैं।

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